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Thursday, 1 August 2013

सुना लतीफा पाक ने, कैप्टन सौरभ क़त्ल

'बेशर्म' पाकिस्तानः कैप्टन सौरभ कालिया की शहादत ...

पाकिस्तान का झूठ एक बार फिर दुनिया के सामने आ गया है. कारगिल जंग के दौरान शहीद हुए कैप्टन सौरभ कालिया के बारे में पाकिस्तान ये कहता रहा कि उनका शव गड्ढे में मिला था, लेकिन इंटरनेट पर तेजी से फैल रहे एक वीडियो से जाहिर हो ...

अमर उजाला




सुना लतीफा पाक ने, कैप्टन सौरभ क़त्ल 
बजा तालियाँ भूल मत, लगे ठिकाने अक्ल  

लगे ठिकाने अक्ल, माफ़ ना होगी हरकत  
रहा सदा तू भोग, कभी ना होय बरक्कत 

बहे पाक में खून, बददुवा दिया खलीफा
हर दिन मरता पाक, नहीं क्या सुना लतीफा

Friday, 26 July 2013

वोटों की दरकार, गरीबी वोट बैंक है-

लेकर कुलकर आयकर, करती क्या सरकार |
लोकतंत्र सुकरात का, वोटों की दरकार |


वोटों की दरकार, गरीबी वोट बैंक है | 
विविध भाँति सत्कार, तंत्र में फर्स्ट-रैंक है |


दे अनुदान तमाम, मुफ्त में राशन देकर |
करते अपना नाम, रुपैया हमसे लेकर ||

फिर भी शेष गरीब, बड़े काहिल नालायक-

लोरी कैलोरी बिना, बाल वृद्ध संघर्ष |
किन्तु गरीबी घट गई, जय हे भारतवर्ष |

जय हे भारत वर्ष, जयतु जन गन अधिनायक |
फिर भी शेष गरीब, बड़े काहिल नालायक |

कमा सकें नहिं तीस, खाय अनुदान अघोरी |
या नेता चालाक, लूटते गाकर लोरी  ||


सकते में है जिंदगी, दो सौ रहे कमाय |
कुल छह जन घर में बसे, लाल कार्ड छिन जाय | 

लाल कार्ड छिन जाय, खाय के मिड डे भोजन -
गुजर बसर कर रहे, कमे पर कल ही दो जन |

अब केवल हम चार, दाल रोटी नित छकते |
तब हम भला गरीब, बोल कैसे हो सकते ||

Wednesday, 24 July 2013

बो के भ्रष्टाचार जो, ले कालाधन काट-


बो के भ्रष्टाचार जो, ले कालाधन काट |
वो ही खाए आम कुल,  बेंच गुठलियाँ हाट | 

बेंच गुठलियाँ हाट, लाट फिर से बन जाता |
जमा हुन्डियां ढेर, पुश्त फिर कई खिलाता |

क्या कर लेगा शेर, इकट्ठा गीदड़ होके |
लेते रस्ता घेर, विदेशी देशी *बोके |
*मूर्ख
 पावरटी घट ही गई , बीस फीसदी शुद्ध |
मँहगाई पर ना घटी, पावरोटियाँ क्रुद्ध |

पावरोटियाँ क्रुद्ध, पाँवड़ा पलक बिछाओ |
नव अमीर बढ़ जाँय, गीत स्वागत के गाओ |

डर्टी पिक्चर देख, लगा सत्ता कापर-टी |
रोके पैदावार, घटा देती पावरटी || 




सकते में है जिंदगी, दो सौ रहे कमाय |
कुल छह जन घर में बसे, लाल कार्ड छिन जाय | 


लाल कार्ड छिन जाय, खाय के मिड डे भोजन -
गुजर बसर कर रहे, कमे पर कल ही दो जन |


अब केवल हम चार, दाल रोटी नित छकते |
तब हम भला गरीब, बोल कैसे हो सकते ||

Tuesday, 23 July 2013

दुर्मर-दामिनि देह, दुधमुहाँ-दानव ताके-

छोरा छलता छागिका, छद्म-रूप छलछंद |
नाबालिग *नाभील रति, जुवेनियल पाबन्द |

जुवेनियल पाबन्द, महीने चन्द बिता के |
दुर्मर-दामिनि देह, दुधमुहाँ-दानव ताके-

दीदी दादी बोल, भूज छाती पर होरा |
पा कानूनी झोल, छलेगा पुन: छिछोरा ||
*स्त्रियों के कमर के नीचे का भाग

Wednesday, 17 July 2013

मुआवजा ऐलान, दुशासन साख बचाए-

  घटना पर घटना घटे, घटे नहीं सन्ताप |
थे तो लाख उपाय पर, बाँट रहे दो लाख |


बाँट रहे दो लाख, नहीं बच्चे बच पाए |
मुआवजा ऐलान, दुशासन साख बचाए |

बच्चे छोड़ें जगत, छोड़ते वे नहिं पटना  |
बके बड़ा षड्यंत्र,  विपक्षी करते घटना ||




मन्त्रालय रख तीस ठो, नीति नियम नीतीश |
धूल धूसरित हो रहे, खा कर मरते बीस |


खा कर मरते बीस, बाढ़ ने कितने खाये |

इधर धमाका होय, उधर नक्सल धमकाए |





बची रहे सरकार, फेल हो जाए तंत्रा |

लम्बी चौड़ी खीस, बनाया असली मंत्रा ||
अफरा-तफरी मच गई, खा के मिड-डे मील |
अफसर तफरी कर रहे, बीस छात्र लें लील |


बीस छात्र लें लील, ढील सत्ता की दीखे |
मुवावजा ऐलान, यही इक ढर्रा सीखे |


आने लगे बयान, पार्टियां बिफरी बिफरी |
किन्तु जा रही जान, मची है अफरा तफरी ||

Tuesday, 16 July 2013

एक अकेला घाव, दिया अपनों ने मिलकर-



सिसकारे बिन सह गया, सत्तर सकल निशान |
उन घावों को था दिया, हमलावर अनजान |

हमलावर अनजान, किन्तु यह घाव भयंकर |
एक अकेला घाव, दिया अपनों ने मिलकर |

प्राणान्तक यह घाव, खाय कर रविकर हारे |
अन्तर दिखता साफ़, आज अन्तर सिसकारे ||