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Wednesday, 24 October 2012

बच्चे चार करोड़ जब, गए रास्ता भूल-


सड़क
मद्धिम गति से नापिए, कहीं रपट न जाय ।
दस गड्ढों के बीच में, देते सड़क बनाय।।


स्वास्थ्य
राम भरोसे स्वास्थ्य है, चमके नीम हकीम ।
रोज हजारों शिशु मरें, लिखता रहा मुनीम ।

 पानी
पानी बोतलबंद है, पी लो मित्र खरीद ।
बत्तिस में दिन भर पियो, कर लो होली ईद ।

  शिक्षा
बच्चे चार करोड़ जब, गए रास्ता भूल ।
मिड-डे  भोजन पच रहा, झोंक आँख में धूल ।।

उच्च शिक्षा
नाकारा इंजीनियर, बढ़ें साल में  ढेर।
ना घर के ना घाट के, देख गली के शेर ।।

 सुरक्षा
सके परिंदा मार पर, बड़ी असंभव बात ।
कड़ी सुरक्षा दे दिखा, जन सेवक औकात ।।

  भोजन
राशन पानी में सड़े, रहस्य छुपे बड़वार ।
बोतल में ले घूमिये, लो लपेट अखबार ।।

2 comments:

  1. बहुत धारदार तंज है भाई साहब .

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