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Wednesday, 19 September 2012

बढ़िया बढ़िया किन्तु, तर्क से हारे बढ़िया-

बढ़िया घटिया पर बहस, बढ़िया जाए हार |
घटिया पहने हार को, छाती रहा उभार | 

छाती रहा उभार, दूर की लाया कौड़ी  |
करे सटीक प्रहार, दलीले भौड़ी भौड़ी |

तर्कशास्त्र की जीत, हारता मूर्ख गड़रिया |
बढ़िया बढ़िया किन्तु, तर्क से हारे बढ़िया ||



मेरे सुपुत्र का ब्लॉग 

आज के व्यंजन

kush  
सोते कवि को दे जगा, गैस सिलिंडर आज ।
असम जला, बादल फटा, गरजा बरसा राज ।
गरजा बरसा राज, फैसला पर सरकारी ।
मार पेट पर लात, करे हम से गद्दारी ।
कवि "कुश" जाते जाग, पुत्र रविकर के प्यारे ।
ईश्वर बिन अब कौन,  यहाँ हालात सुधारे ।।

5 comments:

  1. गणेश चतुर्थी की शुभकमनायें...

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  2. रविकर जी राह दिखाये ,बेटा करे कमाल
    एक दिन ऐसा आएगा,कवि कुश करे धमाल,,,,

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  3. रविकर कवितापुष्‍प है कुंडलियाँ अनमोल
    अपनी छोटी समझ से आनन्‍द तू न तोल

    आनन्‍द तू न तौल बडे दिग्‍गज हैं हारे
    तेरी कौन बिसात अरे नादान बेचारे

    पढता जा बस इनकी ये प्‍यारी रचनाएँ
    जीवन में शायद तू भी रचना कर पाए ।।

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    Replies
    1. श्रीमान ! आभार है, शिरोधार्य उपदेश |
      हार-जीत की चाह से, सदा बढ़े हैं क्लेश |
      सदा बढ़े हैं क्लेश, द्वेष रविकर नहिं करता |
      पढ़कर रचना श्रेष्ठ, सदा ही स्वयं निखरता |
      जयतु संस्कृत जगत, जगत में जो निखार है |
      योगदान अनमोल, श्रीमान आभार है ||

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