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Saturday, 18 August 2012

करता बंदरबांट, कटे वासेपुर अन्दर-



अंगारों पर ही बसा, है झरिया अधिकाँश |
भू-धसान हरदिन घटे, जलता जिन्दा मांस |
जलता जिन्दा मांस, जलाने वालों सुन लो |
इक बढ़िया सी मौत, स्वयं से पहले चुन लो |
खड़ी हमारी खाट, करे चालाक मिनिस्टर |
करता बंदरबांट, कटे वासेपुर अन्दर ||
Coal fire








कौड़ी कौड़ी बेंचते,  झारखंड का माल ।
बाशिंदे कंगाल है,  पूछे मौत सवाल ।
पूछे मौत सवाल, आज ही क्या आ जाऊं ?
पल पल देते टाल, हाल क्या तुम्हें बताऊँ?
डूब मरे सरकार, घुटाले करके भारी ।
होते हम तैयार,  रखो तुम भी तैयारी ।।
endless_fires_10.jpg
अंग नंग अंगा दफ़न, कफन बिना फनकार ।
रंग ढंग बदले सकल, रहा लील अंगार ।
रहा लील अंगार, सार जीवन का पाया ।
होवे न उद्धार,  आग जिसने भड़काया ।
रविकर भरसक खाय, लिए मुट्ठी अंगारा ।
राक्षस किन्तु जलाय, कोयला  रखे दुबारा  ।।

11 comments:

  1. यह पढ़कर वो शायद डर जाएं ।

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (19-08-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  3. वाह! सुंदर प्रस्तुति। काफ़ी खिंचाई की है :)

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  4. इतना मार्मिक प्रसंग है इस पर तो टिपण्णी करते भी नहीं बनता ,शरम उनको फिर भी नहीं आती

    मजबूरी साझी सरकार ,
    हाथ में कोयले ,ऊखल में सिर ,
    करेंगे मिलकर भ्रष्टाचार ,
    चारा तो हम ही खायेंगे ,
    करनी अपनी भुगतो यार .कृपया यहाँ भी पधारें -
    ram ram bhai
    रविवार, 19 अगस्त 2012
    मीग्रैन और क्लस्टर हेडेक का भी इलाज़ है काइरोप्रेक्टिक में

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  5. मार्मिक शब्दचित्र.. आपके अपने स्टाइल से परे!!

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  6. बहुत उत्तम कुंडलियाँ सार्थक व्यंग्य बहुत खूब हार्दिक बधाई

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  7. अत्यंत मार्मिक पोस्ट।

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  8. बहुत अच्छी रचना
    क्या कहने

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  9. मार्मिक पोस्ट।

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