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Thursday, 9 August 2012

जया सोनिया शक्ल, कांपते सिन्धी-शिंदे-


सिन्धी-शिंदे खा रहे,  निज गृह नित फटकार |
नारी शक्तिकरण में, बिला-वजह की रार |

बिला-वजह की रार, नहीं नाजायज सत्ता |

 बने असम में फिल्म, चले दिल्ली-कलकत्ता |

व्यंग-चिकोटी काट, पुरुष जुल्मी शर्मिन्दे ||

जया सोनिया शक्ल, कांपते सिन्धी-शिंदे |

समझी झट इस बार, तभी तो फट गुस्साई-
 समारोह दीक्षांत में, दिग्गी राजा आय |
हिंदी-डिग्री सौंपते, पाय सोनिया माय |
पाय सोनिया माय, थैंक्यू कह शरमाये |
वो संसद जब जाय, समझ में चर्चा आये |
अडवानी की बंद,  करे इक दिवस बोलती |
गुस्से का इजहार, जुबाँ इस कदर खोलती |


इत्ता गुस्सा बाप रे, अडवानी की भूल |
यू पी ए टू कह गए, दे दी जम के तूल |
दे दी जम के तूल, मीडिया समझ न पाया |
रविकर ने इस बार, उसे ऐसे समझाया |
हिंदी भाषा ज्ञान,  ख़तम की पूर्ण पढ़ाई |
 समझी झट इस बार,  तभी तो फट गुस्साई ||

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