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Friday, 1 November 2013

डरे सुपारी से अगर, कैसे होय सुपार |


 डरे सुपारी से अगर, कैसे होय सुपार |आज मरे या कल मरे, ये तो देंगे मार |

ये तो देंगे मार, जमाना दुश्मन माना |शायद टूटे तार, किन्तु छोड़े क्यूँ गाना |


दीवाना यह देश, देखता राह तुम्हारी |जीतोगे तुम रेस, आप से डरे सुपारी ||


3 comments:

  1. वाह...उत्तम लेखन ...दीपावली की शुभकामनाएं.....

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  2. शुभ दीपावली !!आशा है कि आप सपरिवार सकुशल होंगे |
    सुन्दर रचना प्रेरणाप्रद !!

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  3. बहुत सुंदर !
    दीपावली की शुभकामनाएं

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