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Monday, 7 October 2013

मुर्दे हुवे मुरीद, डराये अलग-कायदा-

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PD SHARMA, 09414657511 (EX. . VICE PRESIDENT OF B. J. P. CHUNAV VISHLESHAN and SANKHYKI PRKOSHTH (RAJASTHAN )SOCIAL WORKER,Distt. Organiser of PUNJABI WELFARE SOCIETY,Suratgarh (RAJ.) 
(1)





वायदा करते जाइये, भली करें ना राम |
हक़ नाहक दे मत उन्हें, सकते छीन तमाम |

सकते छीन तमाम, दुर्ग भी सकें भेद वे |
वोट बैंक मजबूत, तभी दल चाटें तलवे |

मुर्दे हुवे मुरीद, डराये अलग-कायदा |
पलकों पर बैठाय, करे लीडरी वायदा ||

(2)
कर्जा खाए पार्टियाँ, रही चुकाय उधार |
मंत्री गृह-मंत्री कभी, कभी सकल सरकार |

कभी सकल सरकार, तुम्हे दे सकल संपदा |
तुम ही तारण-हार, हरोगे तुम ही विपदा |

खोवे रविकर होश, पाय के दोयम दर्जा |
हक़ अव्वल निर्दोष, उठा तू मोटा कर्जा |

10 comments:

  1. नमस्कार आपकी यह रचना कल मंगलवार (08-10-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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  2. आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार ८ /१०/१३ को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहां हार्दिक स्वागत है ।

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  3. अरे वा पूरा चार्वाक दर्शन बखान कर दिया। सराक्रें इसी दर्शन पर तो चलतीं हैं (पर्यटन करतीं हैं चलती कहाँ हैं ).

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  4. सुन्दर ,सरल और प्रभाबशाली रचना। बधाई।
    कभी यहाँ भी पधारें।
    सादर मदन

    http://saxenamadanmohan1969.blogspot.in/
    http://saxenamadanmohan.blogspot.in/

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  5. सरकार कि तरफ से आपने उनकी स्तुति कर डाली -बहुत खूब
    latest post: कुछ एह्सासें !

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  6. बहुत ही सुन्दर..

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  7. बहुत ही बेहतरीन
    :-)

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  8. कोई खाके हो रहा मोटा, कोई हो रहा पतला
    देर न करो भैय्या रविकर,तुम भी कर लो घपला //
    बहुत खूब.. विजयदशमी की बधाई

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