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Wednesday, 2 October 2013

दायें बीयर बार पब, बाएं बिकता गोश्त

गाँधी कब का भूलते, दो अक्तूबर दोस्त |

दायें बीयर बार पब, बाएं बिकता गोश्त |

बाएं बिकता गोश्त, पार्क में अनाचार है |


उधम मचे बाजार, तडपती दिखे नार है |

इत मोदी का जोर, बड़ी जोरों की आँधी |


उत उठता तूफ़ान, दिखा गुस्से में गाँधी ||

5 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (04-10-2013) को " लोग जान जायेंगे (चर्चा -1388)
    "
    पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है.

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  2. मस्त है ... आज के गांधी तो सो रहे हैं ...

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  3. सशोधित रूप रचना का और प्रखर हुआ है।

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  4. जोरदार।
    आज के गांधी का गुस्सा अनाचार पर नही मोदी पर है।

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