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Tuesday, 23 July 2013

दुर्मर-दामिनि देह, दुधमुहाँ-दानव ताके-

छोरा छलता छागिका, छद्म-रूप छलछंद |
नाबालिग *नाभील रति, जुवेनियल पाबन्द |

जुवेनियल पाबन्द, महीने चन्द बिता के |
दुर्मर-दामिनि देह, दुधमुहाँ-दानव ताके-

दीदी दादी बोल, भूज छाती पर होरा |
पा कानूनी झोल, छलेगा पुन: छिछोरा ||
*स्त्रियों के कमर के नीचे का भाग

8 comments:

  1. बहुत उम्दा कुण्डलिया,रविकर जी !
    latest दिल के टुकड़े
    latest post क्या अर्पण करूँ !

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  2. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल गुरुवार (25-07-2013) को "ब्लॉग प्रसारण- 66,सावन के बहारों के साथ" पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है.

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  3. चुटील, कटु सत्य ... जय हो क़ानून की ...

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  4. सुन्दर अभिव्यक्ति....

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  5. बहुत ही सटीक.

    रामराम.

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  6. वाह, बहुत सुन्दर रविकर जी.

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  7. राक्षसों में कोई नाबालिग होता है क्या ?

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