Followers

Monday, 30 April 2012

निकृष्ट जीवन मानिए, जो होते कामांध-

कामकाज  में  लीन  है,  सुध  अपनी विसराय |
उत्तम प्राकृत मनुज  की,  ईश्वर  सदा  सहाय ||


The surgical instrument manufacturing industry of Sialkot in Pakistan   

कामगार की जिन्दगी, खटता  बिन तकरार |
थोथे  में   ढूंढे  ख़ुशी,  मालिक  का  आभार || 


    Lazy Man Laying on a Couch
कामचोर  कायल  करे,   कहीं   कायली  नाँय |
दूजे के श्रम पर  जिए,  सोय-सोय मर जाय ||   

File:Pisanello 010.jpg 


निकृष्ट   जीवन   मानिए,  जो  होते  कामांध |
डूबे  और  डुबाय   दें,   ज्यों  टूटे  तट-बाँध  ||

Various fish drawings - GraphicRiver Item for Sale

कामध्वज  की  जिन्दगी,  त्याग नीर का नेह |
क्षुधित जगत पर मर मिटे, पर-हित  धारी  देह ||

File:Italienischer Maler des 17. Jahrhunderts 001.jpg

पेटू   कामाशन   चहे,  कामतरू   के   तीर |  
भोजन  के  ही  वास्ते,  धारा   तोंद - शरीर ||

7 comments:

  1. बेहतरीन लिखे हैं सर!
    मई दिवस की शुभकामनाएँ!


    सादर

    ReplyDelete
  2. असली काम तो वही है जिसे आपने बताया है!
    श्रमिकों को नमन !

    ReplyDelete
  3. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति
    बुधवारीय चर्चा-मंच पर |

    charchamanch.blogspot.com

    ReplyDelete
  4. कामकाज में लीन है, सुध अपनी विसराय |
    उत्तम प्राकृत मनुज की, ईश्वर सदा सहाय ||
    निकृष्ट जीवन मानिए, जो होते कामांध |
    डूबे और डुबाय दें, ज्यों टूटे तट-बाँध ||
    रचना है रविकर जी की अति उत्कृष्ट .. (.कृपया यहाँ भी पधारें - )

    कैंसर रोगसमूह से हिफाज़त करता है स्तन पान .
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/2012/05/blog-post_01.html

    ReplyDelete
  5. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  6. कामगार की जिन्दगी, खटता बिन तकरार |
    थोथे में ढूंढे ख़ुशी, मालिक का आभार ||

    कामचोर कायल करे, कहीं कायली नाँय |
    दूजे के श्रम पर जिए, सोय-सोय मर जाय ||
    sateek sarthak chintran

    ReplyDelete