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Monday, 11 March 2013

कातिल गए स्वदेश, फंसा इक और मिसाइल-

1
टली वापसी सिरों की, पाक-जियारत पूर । 
 मछुवारों के मौत का, अभी फैसला दूर । 
 
अभी फैसला दूर, मिली नहिं चॉपर फ़ाइल । 
कातिल गए स्वदेश, फंसा इक और मिसाइल । 
 
भेजे सुप्रिम-कोर्ट, देखिये बढ़ी बेबसी । 
कातिल नातेदार, नहीं देगा अब इटली ॥  
(१ )
टिली-लिली टिल्ला टिका, टिल्ले बड़ा नवीस । 
इटली के व्यवहार पर, फिर से निकली खीस । 
टिली-लिली = अंगूठा दिखाना 
टिल्ला= धक्का 
टिल्ले-नवीस = बहाने बाजी

 2

नारा की नाराजगी, जगी आज की भोर-

 नारा की नाराजगी, जगी आज की भोर । 
यह नारा कमजोर था, नारा नारीखोर । 
नारा नारीखोर, लगा सड़कों पर नारा । 
नर नारी इक साथ, देश सारा हुंकारा। 
कर के पश्चाताप, मुख्य आरोपी मारा । 
  नेता नारेबाज, पाप से करो किनारा ॥ 

6 comments:

  1. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुती,सादर आभार.

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  2. वाह बहुत सुंदर रचना
    badhai

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  3. भाई साहब,सुन्दर वर्णावृत्ति,ध्वन्यात्मकता,अनुप्रास और यमक आदि अलंकारों के प्रयोग हेतु वधाई!
    भारत को काँटा चुभा, रही 'विदेशी नीति |
    'प्रेम'को दूषित कर रही,घटिया दुर्नीति ||

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  4. भारत को काँटा चुभा, रही 'विदेशी नीति |
    'प्रेम'को दूषित कर रही,है घटिया दुर्नीति ||

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