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Thursday, 14 June 2012

माँ की उलटी चाल, बिचारा पुत्र कुंवारा -

सोमनाथ मोहन दरश , पढ़ते मन्त्र कलाम ।
प्रणव वाद्य की गूँज से, बहरे हुवे तमाम ।

बहरे हुवे तमाम, नाम की माला जापें ।
दीखें रविकर खाम, दूर से रस्ता नापें ।

माँ की उलटी चाल, बिचारा पुत्र  कुंवारा ।
पति की बाकी दौड़, राष्ट्रपति मारी-मारा ।।

5 comments:

  1. बहुत खूब जी !!

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  2. यह राजनीति की चाल है, टेढ़ी-मेढ़ी, आड़ी-तिरछी।

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  3. टीएमसी की गुगली,दिखती होती फेल
    कांगरेस ने रेस में,सबकी कसी नकेल

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    1. रविकर बैठे देखते , पॉलिटिक्स का खेल |
      धार तेज सरकार की, बहे किस तरफ तेल ||

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